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एक विलन रिटर्न्स Movie Review

Om Lavaniya

by ओम लवानिया
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लेखक-निर्देशक मोहित सूरी ने मर्डर मिस्ट्री थ्रिलर के मूल पार्ट को सीक्वल दिया है। इसके ट्रेलर ने डिसेंट बज छोड़ा था, देखने की कुलबुलाहट हुई। देख डाली ए…. विल्लन टाइटल बदलना चाहिए था

‘लीजेंड व ऑस्कर कैटेगरी के कलाकार केआरके की कमी सख्त खली है। पहली में उनका गेस्ट अपीरियंस ने ही सफलता प्रदान करवाई थी। बाक़ी रितेश व सिद्धार्थ और श्रद्धा कपूर में कहाँ दम था, फ़िल्म को सफलता की ओर खींच ले जाएं, केआरके इसमें भी डिज़र्व करते थे। शायद 2023 ऑस्कर जीत जाते’

लेखन डिपार्टमेंट में मोहित सूरी ने असीम अरोरा का साथ लिया है। यक़ीनन, मोहित ने मलंग व इस कंटेंट पर एक साथ काम किया होगा। पहले मलंग बनाई, उसके बाद रिटर्न्स लाए है। राकेश महाडकरी की थ्रिलिंग कहानी को गौतम मेहरा, भैरव पुरोहित, आरवी मल्होत्रा और रसिका मापुस्कर आगे बढ़ाते है। मोहित ने इन किरदारों की कहानी को थ्रिल दिया है। स्क्रीन प्ले फ़ास्ट पेस में उतारा है। इसलिए स्क्रीन पर सबकुछ टी-20 स्टाइल में होता है। इसका फॉर्मेट अतीत-वर्तमान के परिपेक्ष्य में लिखा है।

पहला हाफ किरदारों के डवलपमेंट और पास्ट व प्रेजेंट में उलझा रहा। परन्तु, आरवी मल्होत्रा यानी तारा सुतारिया को टपका दिया जाता है। कोई किरदार दर्शकों से कनेक्ट करने को राजी न होता है, सब अपनी उधेड़बुन में लगे रहे। दूसरा हाफ आता और गौतम व भैरव को आमने-सामने कर देता है और फुल लात-घूँसे बरसते है। हालांकि सब प्रेडिक्टेबल रहा। तभी तो लेखन विभाग ने अर्जियां दी होंगी, कुछ क्वालिटी वक्त दे दो, बेहतर रिजल्ट निकलेगा। मोहित बाबू ने कहा, मैं हूँ ना।

लेखक ने कहानी लिखने से पहले सोच लिया था कि क्लाइमैक्स ही लिखना है बाकी सब तो किरदार अपने-अपने हिसाब से सेट कर लेंगे। अंत में पहले सीक्वेंस का मालूम चलता है कि तारा जिंदा है। अब मोहित का ट्विस्ट है। चारों किरदार एक फ्रेम में कैद है और विलन को आजाद करने की कशमकश जारी है।

डायलॉग में ज्यादा कुछ नहीं है सब नॉर्मल है।

गीत-संगीत में भी हाई-अप है और मल्टीस्टारर भी, चूंकि गालियां अंकित तिवारी की थी, स्वाभाविक है इस बार भी अंकित की रही….लेकिन एकदम सुनी।

एक गीत तनिष्क बागची ने बजाया है। कौशिक गुड्डू ने भी दिल ले लिया है।

जॉन अब्राहम! जॉन मेहनत ख़ूब करते है हर किरदार को ईमानदारी से मिलने की कोशिश में रहते है लेकिन हाव-भाव साथ छोड़ देते है। एंग्री यंग मैन, इनोसेंट, लवर के भाव एडजेस्ट करने में सफल रहे है। भैरव को ठीक बॉडी स्पेस दिया है।

अर्जुन कपूर! निःसन्देह कलाकार बढ़िया है लेकिन कतई सीरियस नहीं है। गौतम मेहरा किरदार भी असल जीवन की भांति मिल गया। वैसे मोहित ने इस किरदार में आदित्य रॉय कपूर को देखा था, लेकिन आदित्य ने मोहित के गौतम को देखने से मना कर दिया। उसकी वजह मलंग की असफलता हो सकती है। परन्तु बॉलीवुड की बालकनी में खबर बैठी हुई थी। कुछ क्रिएटिव डिफरेसेस की वजह से बात न बनी। वाक़ई यह स्टैंडर्ड व प्रोफेशनल स्टेटमेंट है।

तारा सुतारिया और दिशा पाटनी, मोहित को सस्पेंस के लिए किरदार जोड़ने थे। साथ ही ग्लेमर भी चाहिए था। बाक़ी इन दोनों ने कंटेंट को ऐसा कुछ न दिया है जिसे देखकर कहा जाए….मोगेंबो खुश हुआ।

दिशा के फेस पर कोई भाव ही नहीं है। किसी भी एंगल से देखो, अबतक की सारी फिल्में देख लो। सब फ़िल्मों में हूबहू एक ही लाइन में नजर आएंगी। जेडी चक्रवर्ती! एसीपी गणेशन से मिले है। इनके पास ज्यादा कुछ न था। जितना मिला ठीक रहे।

शाद रंधावा! पिछली कड़ी में एसीपी राठौर से मिले थे। इसमें लेखक ने पूरी तरफ बदल दिया और हमूद किरदार पकड़ा दिया। अगर मोहित इन्हें उसी किरदार में रखते और जेडी को न लेते, तब भी कोई फर्क न पड़ता। रितेश देखमुख! लेखक महोदय ने क्लाइमैक्स के आख़िरी में मूल से सीक्वल को जोड़ा है। तीसरी कड़ी की संभावना वक्त की है। मेरे हिसाब से न बनाए तो बेहतर है।

एडीटिंग! देवेंद्र मुर्देश्वर ने एडिटिंग टेबल पर मोहित के कारनामे को धार दी है। एडिटर ने फ़िल्म को संभाल लिया है जितना उसके हक में था। निर्देशन! मोहित सूरी ने जो लिख दिया था उसे दिखला-बतला गए। 2 घण्टे आठ मिनट में निपटा गए। उन्हें कोई लेना देना न था कि ऑडियंस कहानी व किरदारों से जुड़ेगी, न उन्होंने कोशिश की। ख़ैर।

मूल के मुकाबले बहुत पीछे है हालांकि असल प्रति संगीत की वजह से अच्छी चल पड़ी थी। जिन्हें मोहित सूरी के कंटेंट पसन्द है अवश्य देखें। औसत मार्क के साथ एक बार देखी जा सकती है। फ़िल्म को लेकर ट्रेड की हलचल देखें, तो पहले दिन का ट्रेड ट्रेंड 7-8 करोड़ के बीच रहेगा और वीकेंड 25 प्लस रह सकता है। उसके बाद टाटा बॉय बॉय…ख़त्म

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