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नमाज़ का प्रतिउत्तर हनुमान चालीसा

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नमाज़ का प्रतिउत्तर हनुमान चालीसा
कितनी अजीब बात है कि हम केवल प्रतिउत्तर तक सीमित रह गए हैं, यदि दूसरा कुछ करेगा तो हम उसके प्रतिउत्तर में ही कुछ करेंगे अन्यथा नहीं..!
बात केवल राजठाकरे की नहीं है हम सभी की यह प्रवृत्ति बन गयी है , आज तक न हम प्रश्न बन पाए और न ही उत्तर और न ही क्रिया..!
इतने साल देश को आज़ादी मिले हुए लेकिन हम सिर्फ क्रिया की प्रतिक्रिया देने वाले ही बनकर रह गए। कितने ऐसे लोग हैं जो एक संस्था के रूप में नए युवाओं से मिलकर उनसे संपर्क साधकर किसी निश्चित समय में हनुमान चालीसा या गायत्री मंत्र का पाठ करते हैं किसी एक विशेष जगह इकठ्ठा होकर….!
हिन्दू युवा भटका हुआ मात्र एक भीड़ है जो क्षण भर में तितर बितर हो जाता है। हिंदुओं की स्थिति मात्र एक ट्रोलर की बनकर रह गयी है
जब धर्म आपके आचरण में नहीं है तो ट्रोलिंग करके धर्म रक्षा करने का सपना त्याग दो कोई अर्थ नहीं इसका
जिस दिन हर मंगलवार को हजारों युवा दिनचर्या के हिसाब से हनुमान चालीसा पढ़ते नज़र आएंगे हर एक क्षेत्र में, जब गायत्री मंत्र का जाप करते हजारों युवा एक साथ बैठेंगे,तब मानो कि हम सही दिशा में है।
जो कहते हैं इन सब की कोई आवश्यकता नहीं वो मात्र एक दार्शनिक खिचड़ी पका रहें हैं उसमें क्षणिक भी स्थिरता नहीं रहेगी।
जब ऑफिस में भोजन करते समय भोजन मन्त्र पढोगे, भोग लगाओगे, आचमन करोगे , जब मुख पर ही नहीं आचरण में भी धर्म को स्थान दोगे तब जान लो आपकी दिशा सही है।
बाकी मुख से बोलकर, लिखकर तो पूरी दुनिया ही धर्मिष्ठ है। जब आपका मन कहे कि जरूरी नहीं है यह सब करना तो एक बार बैठकर विचार करना आखिर क्यों आपके अंदर ऐसे विचार आते हैं…?
जिस समुदाय की प्रवृत्ति और आचरण में धर्म नहीं है वह समुदाय नष्ट होने के लिए ही बना है , वो सिर्फ बातों की गपोड़ीबाजी करने वाला सिर्फ मसखरों का समूह होता है, निर्णय आपको करना है, आप क्या हो..?

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