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भारतीय अर्थव्यवस्था में बदलाव

Amit Singhal

by अमित सिंघल
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पिछले दिनों कुछ आकड़े सामने आए जो सामूहिक रूप से इंगित करते है कि भारतीय अर्थव्यवस्था लगातार स्टेबल एवं सुदृढ़ होती जा रही है।
प्रथम, भारतीयों ने सेल फ़ोन से, UPI (फोनपे, पेटीएम, भीम, रुपे इत्यादि) के द्वारा अकेले दिसंबर 2022 में 12.82 लाख करोड़ रुपये भुगतान किया। इस वित्तीय वर्ष के प्रथम 9 माह (अप्रैल-दिसंबर) में लगभग 100 लाख करोड़ रुपये UPI के माध्यम से पे किया गया। दिसंबर के ट्रेंड के आधार पर, जनवरी से मार्च 2023 में लगभग 42 लाख करोड़ रुपए का अतिरिक्त UPI भुगतान होने की आशा है जो कुल लेन-देन को 142 लाख करोड़ रुपए ले जाएगा।
इस वित्तीय वर्ष में जीडीपी 260 लाख करोड़ रुपये पहुंचने की आशा है। दूसरे शब्दों में, हमारी जीडीपी का 55% भाग सेल फ़ोन या UPI द्वारा किये जाने वाले भुगतान के माध्यम से आएगा। इस लेन-देन में डेबिट-क्रेडिट कार्ड, बैंक ट्रांसफर, बैंक ड्राफ्ट, चेक इत्यादि द्वारा किये जाने वाले भुगतान को नहीं जोड़ा गया है। साथ ही, पंचतारा होटल, कैश ऑन डिलीवरी, बड़े शोरूम इत्यादि में किये जाने वाले कैश भुगतान की पक्की रसीद मिलती है जो रिकॉर्ड में आ जाता है।
मेरा अनुमान है कि मार्च 2024 (अर्थात अगले वित्तीय वर्ष के अंत तक) भारत की अर्थव्यवस्था का 80% सरकारी रेकॉर्डों में कैप्चर हो जाएगा। दूसरे शब्दों में जीडीपी का 80% फॉर्मल इकोनॉमी से आएगा। यूरोप के देशो में अर्थव्यवस्था का 20 प्रतिशत भाग अभी भी इनफॉर्मल है; अर्थात पूर्णतया कैश आधारित है।
ध्यान दिलाने के लिए वर्ष 2014 में जीडीपी का लगभग 45% भाग फॉर्मल इकोनॉमी से आता था; शेष 55% लेन-देन का कोई रिकॉर्ड नहीं था, ना ही उस पर कोई टैक्स था।
दूसरा आंकड़ा GST के कलेक्शन को लेकर है जो दिसंबर में 1.50 लाख करोड़ रुपये था (यह नवंबर में पे किये गए भुगतान पर लगा GST है)। अर्थात, UPI द्वारा कुल लेन-देन (12.82 लाख करोड़) का 12.5%। अगर अन्य माध्यम (डेबिट-क्रेडिट कार्ड, बैंक ट्रांसफर, बैंक ड्राफ्ट, चेक) इत्यादि द्वारा किये जाने वाले भुगतान को जोड़ ले, तो दिसंबर का GST कुल लेन-देन का 7-8% ही बैठेगा।
तृतीय, RBI के अनुसार, सितंबर में बैंको का कुल NPA (मूल प्लस ब्याज) – अर्थात वह बैंक लोन जिसका भुगतान नहीं किया जा सकता – केवल 5.0 प्रतिशत रह गया है जबकि नेट NPA (केवल मूल) दस साल के निम्नतम स्तर 1.3 प्रतिशत पर आ गया।
इन आंकड़ों से कुछ निष्कर्ष निकाल सकता हूँ।
प्रथम, वर्ष 2024 तक टैक्स चोरी, बेनामी संपत्ति, बड़ी घूस एवं भ्रष्टाचार का पैसा खपाने में अत्यधिक कठिनाई आएगी। अभी जो लोग स्वयं को “होशियार” समझ रहे है, वह सभी सरकार के संज्ञान में है।
द्वितीय, कुल लेन-देन पर टैक्स दर अत्यधिक कम है। अगर आप अधिक GST का रोना रोते है, तो कुल लेन-देन का 7-8% ही GST में क्यों कैप्चर हो रहा है? क्या यह सत्य नहीं है कि अधिकतर वस्तुओ पर GST शून्य है या 5% है?
तृतीय, भारतीय बैंक अर्थव्यवस्था में तेजी से पूँजी का निवेश एवं विस्तार कर रहे है जिससे जीडीपी में तीव्र विकास दिखाई देगा। बैंकिंग फ्रॉड के द्वारा अरबपति बनने के दिन लद गए है।
चतुर्थ, जो लोग नोटबंदी का उपहास उड़ाते थे या अभी भी उड़ा रहे है, वही सबसे बड़े जोकर निकल रहे है।
अंत में, भारतीय अर्थव्यवस्था लगातार स्टेबल एवं सुदृढ़ होती जा रही है।

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