Home राजनीति 1996 के वर्ल्ड कप का सेमीफाइनल… भारत बनाम श्रीलंका : ऋषि सौनक का प्रधानमंत्री

1996 के वर्ल्ड कप का सेमीफाइनल… भारत बनाम श्रीलंका : ऋषि सौनक का प्रधानमंत्री

Rajiv Mishra

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पहले ही ओवर में तूफानी जयसूर्या और कालुवितर्ण के आउट होने के बाद हम बहुत ही उत्साहित थे लेकिन अरविंद डिसिल्वा और रणतुंगा ने पारी को संभाला और 252 का टारगेट दिया जो उन दिनों में अच्छा स्कोर गिना जाता था.
जवाब में भारत ने धीमी और सावधानी भरी शुरुआत की और सचिन ने 88 गेंदों में 65 रन बनाए थे. एक समय हम सचिन को धीमा खेलने और शॉट्स न लगाने के लिए कोस भी रहे थे. लेकिन सचिन के 98 पर आउट होने के बाद पूरी टीम भरभरा के 120/8 के स्कोर पर पहुंच गई और फिर ईडन गार्डन की पब्लिक के हंगामे के बाद मैच श्रीलंका को जीता हुआ घोषित किया गया.
जब तक सचिन खेल रहा था, हम उसे धीमा खेलने के लिए कोस रहे थे. लेकिन उसके आउट होने के बाद पता चला कि पिच कितनी खराब हो चुकी थी और उस पिच पर खेलना कितना कठिन था.
कल ब्रिटिश प्राइम मिनिस्टर बोरिस जॉन्सन का जाना तय हो चुका है. बोरिस ने ब्रिटेन को अनिश्चितता के कठिन दौर से निकाला है और ब्रेक्सिट और कोविड के समय में देश को एक आश्वस्त नेतृत्व दिया है. लेकिन पहले ही दिन से यहां का आदमखोर मीडिया उनके पीछे पड़ा था और एक एक करके उनके करीबियों को टारगेट कर रहा था. आखिर में बोरिस का रहना इतना कठिन कर दिया कि ऋषि सौनक जैसे करीबी और भरोसेमंद साथियों ने भी बोरिस का साथ छोड़ दिया.
कुछ लोग ऋषि के प्रधानमंत्री बनने की संभावना से बहुत उत्साहित होंगे. मुझे भी ऋषि सौनक बहुत पसंद हैं और उनमें बहुत संभावनाएं हैं. उनकी इकोनॉमी की दृष्टि थैचर जैसी है और वे वोक वामपन्थी नहीं हैं. लेकिन वे पहले से ही बिना बात के मीडिया के निशाने पर हैं. यह समय एक गैर वामपंथी टोरी के लिए ब्रिटेन के प्रधानमंत्री बनने के लिए अच्छा समय नहीं है. अभी जो भी बनेगा वह असफल होगा और उसका करियर खत्म हो जाएगा.
जब तक अमेरिका में व्हाइट हाउस में डेमोक्रेट्स बैठे हैं, किसी भी गैर वामपन्थी के लिए शासन करना बहुत कठिन होने वाला है. जो टिके हैं उन्हे ही पता है कि कैसे टिके हैं. भारत में भी यही हालत है. हमें भी लगता है कि मोदी खुल के शॉट्स नहीं मार रहे हैं, लेकिन टिके हैं यही बहुत है. शोर चाहे जितना मचा लें, मोदी को हटाने की सोचिएगा भी मत. मोदी अगर गए तो अनर्थ होगा.
आपको लग रहा है कि पेविलियन में बड़े बड़े धुरंधर पैडअप करके बैठे हैं. लेकिन पिच कितनी टर्न ले रही है यह वही जानता है जो पिच पर है. योगी जी और हेमन्त दादा अगर खुल के खेलते दिख रहे हैं तो वह इसलिए क्योंकि इंटरनेशनल प्रेशर को अब्जॉर्ब करने के लिए दूसरे छोर पर मोदी हैं. अगर मोदी हटे तो बाकियों का वही होगा जो ईडन गार्डन में सचिन के आउट होने पर पूरी इंडियन टीम का हुआ था. इसलिए स्टैंड से चाहे सिक्सर सिक्सर चिल्लाइए, बल्लेबाज को वापस बुलाने की गलती मत कीजिएगा. आज दुनिया की पिच गैर वामपंथी राजनीति के लिए बहुत ही खराब हो चुकी है. चौके छक्के भूल कर, सिर्फ टिके रहने की सोचिए.

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