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उन प्राचीन आदिमानवों के बारे में सोचिए | प्रारब्ध

Author - Zoya Mansoori

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उन प्राचीन आदिमानवों के बारे में सोचिए जो खुले आसमान के नीचे पेड़ो और गुफाओ में रहते थे, प्राकृतिक शक्तियों से पूरी तरह अनजान। वो आसमान में चमकती बिजली से डरते थे, आग से डरते थे, बारिश से डरते थे, आंधी से डरते थे , जंगली पशुओं से डरते थे। समय के साथ उनका अवचेतन मन इन शक्तिशाली प्राकृतिक शक्तियों से बेहतर सम्बन्ध बनाने का प्रयास करने लगा होगा और उन्होंने इनकी उपासना शुरू कर दी होगी।
वेदों के सूक्त इन प्राकृतिक शक्तियों को ही समर्पित हैं। मन्त्रो द्वारा अग्नि, वायु, वरुण, चन्द्र, सूर्य, इंद्र आदि प्राकृतिक शक्तियों को साधने के विभिन्न प्रयास किए गए है। लेकिन वेदों में एक और देवता हैं जिन्हें बहुत ज्यादा महत्व नहीं दिया गया, रुद्र। वो एक पेड़ के नीचे योगमुद्रा में सबसे अलग थलग बैठे है और किसी रिचुअल में पार्टिसिपेट नही करते। वैदिक काल मे पहली बार रुद्र केन उपनिषद में स्पष्ट रूप से महत्वपूर्ण दिखना शुरू होते है।
वो एक यक्ष के रूप में देवताओं के सम्मुख आते हैं जिन्हें गौरी परब्रह्मन कहती है। वो इंद्र से कहती है कि रुद्र ही ब्रह्म हैं। श्वेताश्वेतर उपनिषद में रुद्र पहली बार शिव के रूप में नज़र आते है। शिव प्री वैदिक देव है, महादेव हैं। मोहनजोदड़ो में उनका पशुपति नाथ फिगर मिलता है जो महायोगी मुद्रा में है। फिर पुराणों में वो हिन्दू ट्रिनिटी के सबसे महत्वपूर्ण स्तम्भ बन जाते हैं।
ब्रह्मा निर्माता है, विष्णु पालक है जो सृष्टि को चलाते हैं और शिव विनाशक हैं। ब्रह्मा ब्रह्म लोक में रहते हैं ब्रह्मलोक कहाँ है, हम एक्चुअली नही जानते। विष्णु बैकुंठ लोक में रहते हैं। ये अंतरिक्ष मे कहीं है पर कहाँ, हम एग्जेक्टली नहीं जानते। लेकिन शिव इकलौते ऐसे ईश्वर है जो पृथ्वी पर रहते हैं, एक जानी पहचानी ज्योग्राफिकल फिज़िकल लोकेशन, कैलाश पर्वत पर।
आपको अग्नि से डर लगता है, डोंट वरी नटराज के हाथ मे अग्नि पनाह लेती है, आपको मृत्यु से डर लगता है, डोंट वरी महाकालेश्वर से मृत्यु को भी डर लगता है, आपको जल प्रलय से डर लगता है, डोंट वरी गंगाधर के केशों में गंगा नियंत्रित है, आपको जंगली पशुओं से डर लगता है, डोंट वरी शिव बाघम्बर है, वाइल्ड बुल नंदी उनकी शरण मे है, नाग उनके गले की शोभा बढ़ाता है। आपको भूतों से डर लगता है, डोंट वरी वो भूतेश्वर है।
जब आप शिव को पा लेते है तो आपके हर भय का अंत हो जाता है। मनुष्यता के जितने भी भय हैं वो शिव के नियंत्रण में है। शिव चेतना का उच्चतम बिन्दु है जो ‘कुछ नही’ करती। वो सदाशिव है जो खुद से संसार मे पार्टिसिपेट नहीं करते, संसार को उन्हें पाना होता है और शिव को पाने का एक ही रास्ता है, शक्ति।
शिव इकलौते ऐसे ईश्वर है जो सन्यासी भी है और गृहस्थ भी। वो इकलौते ऐसे ईश्वर हैं जिन्हें देवता और असुर दोनों पूजते हैं। प्रह्लाद जैसे एकआध अपवाद छोड़ दे तो कोई असुर विष्णु की पूजा नही करता था। वो इकलौते ऐसे ईश्वर हैं जिन्होंने मनुष्य की पुत्री से विवाह किया। पार्वती इज आ ह्यूमन बीइंग। पार्वती पृथ्वी है, मातृशक्ति हैं, अम्बा हैं। शक्ति आधार है और शिव परब्रह्म।
सब कुछ शिव के नियंत्रण में है और शिव स्वयं जगदम्बा के नियंत्रण में।

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