Home हमारे लेखकसुमंत विद्वन्स पिछले कुछ दिनों में ऐसी कई पोस्ट देखने को मिलीं, जिनमें ‘जयंती’ और ‘जन्मोत्सव’ को लेकर विवाद हो रहा था।

पिछले कुछ दिनों में ऐसी कई पोस्ट देखने को मिलीं, जिनमें ‘जयंती’ और ‘जन्मोत्सव’ को लेकर विवाद हो रहा था।

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पिछले कुछ दिनों में ऐसी कई पोस्ट देखने को मिलीं, जिनमें ‘जयंती’ और ‘जन्मोत्सव’ को लेकर विवाद हो रहा था। कई लोगों ने कहा कि हनुमान जयंती नहीं, हनुमान जन्मोत्सव ही कहा जाना चाहिए। उनका तर्क यह है कि जयंती केवल उनकी होती है, जिनकी मृत्यु हो चुकी है। लेकिन हनुमान जी को चिरंजीव माना जाता है, इसलिए उनकी जयंती कहना गलत है।

 

मैं इस तर्क को सुनकर बड़ा चकित हूं। ऐसा लगता है कि लोग यह मानकर चल रहे हैं कि हर शब्द का केवल एक अर्थ ही हो सकता है और ‘मृतकों का जन्मदिवस’ ही जयंती का एकमात्र अर्थ है। लेकिन मैं नहीं मानता कि यह सही है।
मैंने घटनाओं और संस्थाओं की भी जयंती सुनी है और मनती हुई देखी है। रजत जयंती, स्वर्ण जयंती, हीरक जयंती के समारोह मैंने देखे हैं। शालेय जीवन में हमने अपने विद्यालय की हीरक जयंती देखी थी। 1997 में भारत की स्वतंत्रता की स्वर्ण जयंती और आज 2022 में ‘आज़ादी का अमृत महोत्सव’ के नाम से इसकी 75 वीं जयंती भी देख रहे हैं।
मैंने महिलाओं का नाम भी ‘जयंती’ सुना है। क्या आप समझते हैं कि उनके माता-पिता ने अपनी बेटी को नाम देने के लिए ‘मृतकों के जन्मदिवस’ का अर्थ देने वाला शब्द चुना था? यदि जयंती का एकमात्र अर्थ केवल मृतकों का जन्मदिवस ही है, तो क्या यह तर्क भी देंगे कि यह स्वर्ण जयंती, रजत जयंती सब गलत है क्योंकि वह संस्था तो अभी खत्म नहीं हुई है और आजादी समाप्त नहीं हुई है, इसलिए उनकी जयंती न मनाई जाए?
जयंती शब्द के कई अर्थ हैं। जयंती का एक अर्थ है दुर्गा, पार्वती या शक्ति। जो लोग अपनी कन्याओं को जयंती नाम दे रहे हैं, वे उन्हें दुर्गा कह रहे हैं, वे मृतकों का जन्मदिन नहीं मना रहे हैं। यह कहना सही नहीं है कि जयंती केवल मृतकों की ही होती है और जन्मोत्सव केवल जीवित लोगों का ही हो सकता है।
श्रीराम और श्रीकृष्ण का जन्मोत्सव आज भी हर वर्ष मनाया जा रहा है, जबकि इस बात को सब मानते हैं कि इन दोनों की जीवन लीला समाप्त हो चुकी है। सांसारिक अर्थों में कहा जाए, तो उनकी मृत्यु हो चुकी है। जिनका तर्क यह है कि मृतकों की केवल जयंती मनेगी और जन्मोत्सव केवल जीवित लोगों का ही मनेगा, क्या अब वे राम और कृष्ण के जन्मोत्सवों को भी बंद करवा कर उनकी जयंती मनवाएंगे?
जयंती का सरल अर्थ है वर्षगांठ। जब स्वतंत्रता जैसी किसी घटना की या हमारे विद्यालय जैसी किसी संस्था की रजत जयंती या स्वर्ण जयंती मनाई जाती है, तो उसकी पच्चीसवीं या पचासवीं वर्षगांठ मनाई जा रही है। जब हनुमान जी की जयंती मनाई जाती है, तो उनके जन्म की वर्षगांठ मनाई जा रही है। उसका अर्थ यह नहीं होता है कि उन्हें मृतक माना जा रहा है। जन्मोत्सव का सीधा अर्थ है, जन्म का उत्सव। जयंती के अवसर पर जो आयोजन किया जाता है, वही जन्मोत्सव है।
रामनवमी श्रीराम की जयंती का दिन है और कृष्ण जन्माष्टमी श्रीकृष्ण की जयंती ही है। इन अवसरों पर जो आयोजन किए जाते हैं, वे ही राम और कृष्ण के जन्मोत्सव हैं। इन अवसरों पर मंदिरों में उनके जन्म का उत्सव मनाया जाता है। कई जगह छोटे छोटे झूलों में उनकी मूर्तियों को रखकर झुलाया जाता है, जैसे जन्म के बाद शिशु को झुलाया जा रहा हो। वह उनका जन्मोत्सव है। आप अपने या परिवारजनों के जन्मदिन पर जो आयोजन करते हैं और जिस तरह भी इसे ‘सेलिब्रेट’ करते हैं, वह आपका जन्मोत्सव है। जिस दिन हनुमान जी का जन्म हुआ था, वह दिन हनुमान जी की जयंती है। उस दिन जो आयोजन किया जाता है, वह हनुमान जी का जन्मोत्सव है। इसलिए हनुमान जयंती और हनुमान जन्मोत्सव दोनों ही शब्द बिल्कुल ठीक हैं।
यदि आपको शब्दों के अर्थ न समझ आते हों, तो कोई बात नहीं। यदि आपको यह भी न समझ आता हो कि एक ही शब्द के कई अर्थ हो सकते हैं, तो भी कोई बात नहीं। आपको जन्मोत्सव ही मनाना हो, तो वही मनाइए। लेकिन जिन्हें जयंती कहना सही लगता है, उन्हें गलत साबित करने की धुन में अपने अज्ञान का परिचय मत दीजिए। अनावश्यक उपदेश देने या वाद-विवाद में समय नष्ट करने की बजाय थोड़ा अध्ययन और ज्ञानार्जन करना अधिक उपयोगी है। सादर!

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