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रॉकी और अधीरा का अध्याय

by ओम लवानिया
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रॉकी और अधीरा का अध्याय

 

दर्शक रॉकी और अधीरा का अध्याय पढ़ने के लिए इतने उतावले हो चले है कि कोलार गोल्ड फ़ील्ड यानी केजीएफ़ चैप्टर 2 की अडवांस बुकिंग को असाधारण बना दिया है।
ट्रेड की रिपोर्ट देखकर, इसके पंडित हैरान है। हक्के-बक्के रह गए।
पंडित अनुमान लगा रहे है कि पहले दिन फ़िल्म इतिहास का नया पन्ना लिखेगी। पुराने सारे पन्ने फाड़ देगी। तड़के सुबह 6 बजे से शो खुल जाएंगे। ये ट्रेंड लगभग पैन इंडिया देखने को मिल रहा है।
यश की केजीएफ़ 2 के सामने तमिल सुपरस्टार विजय जोसेफ और बॉलीवुड स्टार शाहिद कपूर टक्कर देने बॉक्स ऑफिस पर खड़े है। शाहिद कपूर नानी की जर्सी पहनकर आ रहे है। उनकी जर्सी कई बार एक्सएल साइज में आ गई थी। इसलिए फ़िल्म निर्माताओं को रिलीज नंबर बदलने पड़े। 14 अप्रैल फाइनल नंबर हुआ है। इससे पहले यश को आमिर खान लाल सिंह के साथ टक्कर देने वाले थे। बैसाखी के उपलक्ष्य में लाल सिंह को रखा था। लेकिन आखिरी मोमेंट पर आमिर खान ओम राउत की आदिपुरुष की ओरिजनल रिलीज डेट खा गए। अप्रैल से सीधे अगस्त में जा पहुँचे।
लाल सिंह के मैदान छोड़ने के बाद बॉलीवुड से शाहिद और तमिल से विजय मैदान में आ पहुँचे। विजय का अपनी फिल्म बीस्ट हिंदी में रॉ को पैन इंडिया लाने का ऐलान कर दिया। ऐसा लग रहा है। कि विजय ने आनन-फानन में पुष्पा व ट्रिपल आर की सफलता को देखकर पैन इंडिया रिलीज का फैसला लिया है। इधर, बॉलीवुड से शाहरुख खान ने खुद को विजय का बड़ा फैन करार दिया। इसका सीधा अभिप्राय है कि विजय शाहरुख खान की फैन फॉलोइंग से लाभ लेना चाहते है।
लेकिन….लेकिन! यश के रॉकी का कद इतना विशालकाय हो चला है। ऊपर से संजय का अधीरा कहर ढा रहा है। जिस अंदाज में रॉकी के टशन की खबरें निकल रही है न! उससे बाद कोई कंटेंट बॉक्स ऑफिस पानी भी नहीं मांगेगी।
यक़ीनन! विजय तमिल रीजन में बीस्ट हो सकते है। अच्छा एज ले उड़ेंगे। लेकिन पैन इंडिया में मुश्किल हालात बन चुके है। दरअसल, केजीएफ़ का प्रमोशनल कार्यक्रम 2018 से ही चल रहा है। लगातार क्रेज बढ़ता जा रहा है। लेकिन बीस्ट के निर्माता 2 अप्रैल को मूल भाषा में ट्रेलर लॉन्च करते है और 3 अप्रैल को हिंदी बेल्ट में जारी करते है। इतने कम वक्त में माहौल बनाना टफ कार्य है। जब त्रिकोणीय बॉक्स ऑफिस क्लेश शेप चुका है।
सबसे बड़ी दिक्कत शाहिद की जर्सी होगी। सबसे अव्वल जर्सी तेलुगु मेटेरियल से बनी है। इसे अधिकांश हिंदी पट्टी दर्शक देख चुके है। तो ऐसे में शाहिद को देखने क्यों निकलेंगे। जब केजीएफ़ मॉन्स्टर सामने खड़ा है और बीस्ट भी निगलने की फिराक में बैठा है। कबीर सिंह की बात अलग थी। तब कबीर का ओरिजनल संस्करण अर्जुन रेड्डी हिंदी डब के साथ न आया था। लेकिन नानी की जर्सी तो उपलब्ध है।
इन हालातों में जर्सी के निर्माता ने खुदकुशी करने की ठान ली है। अगले हफ़्ते के रिलीज स्लॉट में रख देते। तो कुछ दर्शक तो जर्सी पहन लेते। तीन बड़ी फ़िल्मों का एक स्लॉट में आना है तो स्क्रीन काउंट का डर्टी गेम होना लाज़मी है और हम देखेंगे भी…केजीएफ़ के हिंदी वर्ज़न को फरहान अख्तर और अनिल थडानी डिस्ट्रीब्यूट कर रहे है। जबकि जर्सी को डॉमेस्टिक में बालाजी टेलीफिल्म्स व अन्य और ओवरसीज में यशराज फिल्म्स डिस्ट्रीब्यूशन दे रहे है।
तो वही, बीस्ट तमिल से ही डिस्ट्रीब्यूट हो रही है। अभी तक बॉलीवुड से कोई नहीं है। आगे हो सकता है रेड चिलीज़ एंटरटेनमेंट डिस्ट्रीब्यूशन संभाल ले।
जरूर आमिर खान केजीएफ़ की रेंज को भांप चुके थे। इसलिए दौड़ लगा बैठे और अगस्त में जाकर रुके।
ट्रेड में केजीएफ़ का बज इतना हाई है न, कि टिकट प्राइस 2000 तक बिक रहे है। यश ने रॉकी के साथ 2018 में शाहरुख खान को जीरो किया था। उसके बाद आमिर खान का नंबर लगा था। उन्हें किसी ने सलाह दी। निकल गए। वरना इतिहास खुद को दोहरा सकता था।
बैक टू बैक साउथ रीजन कंटेंट की सफलता ने अन्य निर्माताओं के लिए रास्ते खोल दिए है। सबने पैन इंडिया आना है और सफलता की सीढ़ियां चढ़नी है। रीजनल सिनेमाई कलाकार अपने रीजन से बेस्ट देने की कोशिश में लगे है। कि देश व दुनिया देखें। क्षेत्रीय सिनेमा कितना डवलप हो रहा है, कंटेंट व तकनीक वाइज। पुरानी रीत है अच्छा खिलाड़ी ही फ़ील्ड पर सर्वाइव कर पाता है। कमज़ोर खिलाड़ी पैवेलियन में बैठकर दूसरों को ड्रिंक्स सप्लाई कर रहे होते है। इसलिए बेस्ट ही आगे निकलेगा। लूजर पिछडेगा।

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