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लखनऊ शहर में ठेले वाला स्ट्रीट फ़ूड : आपदा में अवसर

नितिन त्रिपाठी

by Nitin Tripathi
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लखनऊ शहर में ठेले वाला स्ट्रीट फ़ूड मोस्ट्ली फ़्राइड आइटम जैसे पूरी सब्ज़ी, खस्ते, पकौड़ी, चाट आदि रहा है. थोड़ा कबाब पराठा और पूर्वांचल की वजह से बाटी चोखा एड हो गया, यंस्टर्ज़ ने मोमोज एड कर दिया.
पिछले दो वर्षों में शहर के फ़ूड कल्चर में ज़बर्दस्त वराइयटी आई. शहर में ठेले पर इडली मिलने लगी, पोहा के स्टाल दिखने लगे, यहाँ तक कि सैंडविच के भी ठेले दिखने लगे, वडापाव के ठेले दिखने लगे, सोया चाप बहुत कॉमन हो गया, रोवर्स की फ़्रेंकी के जमाने लद गए हर नुक्कड़ पर रोल के ठेले दिखने लगे, यहाँ तक कि दबेली के ठेले भी अब दिखने लगे.
वजह यह रही कि करोना काल में दिल्ली, मुंबई, अहमदाबाद से काफ़ी लेबर वापस UP आए. इनमें जो एंटरेपरेन्योर थे वह अपने साथ उन प्रदेशों की कुकिंग स्टाइल ले कर आए और लखनऊ शहर में ही अपना ठेला लगाने लगे. मुंबई में लेबरी करने से लाख गुना बेहतर और रिज़ल्ट प्रडूसिंग रहा लखनऊ में वडापाव का ठेला लगाना. यह अपने साथ महानगरीय कल्चर, प्रॉपर पैकेजिंग, नीट क्लीन हाइजीन, कस्टमर सर्विस जैसी चीजें भी लेकर आए. आज शहर के हर नुक्कड़ पर आपको ये ठेले वाले दिखेंगे. कार रुकते ही उनका असिस्टेंट भाग कर आएगा, कार में ही प्रॉपर सर्व कर जाएगा, पेमेंट ऑनलाइन कर दीजिए.
महानगर में जहां यह एक लेबर थे वहीं यहाँ यह बिज़नस चला रहे हैं, रोजगार दे रहे हैं और सबसे महत्वपूर्ण शहर के कल्चर में विविधता ला रहे हैं.
होनहार आपदा में भी अवसर निकाल लेते हैं और नकारा प्रधामंत्रियों के घर पैदा होकर भी कुछ विशेष नहीं कर पाते.

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