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विक्रम! एलसीयू यानी ‘लोकेश … Movie Review

by ओम लवानिया
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क्रम! एलसीयू यानी ‘लोकेश सिनेमैटिक यूनिवर्स’ इस दुनिया में आगे की कड़ी में सिनेमा रोलेक्स पहनकर, उसका वक्त देखेगा।
‘बॉलीवुड कसम से इस बन्दे से ट्यूशन ले लो यार, एक्शन और नैरेशन कैसे किया जाता है’
युवा तमिल लेखक लोकेश ने अपनी पिछले क्राइम सागा कैथी को विस्तार देने के साथ भारतीय सिनेमा में ‘क्राइम यूनिवर्स’ खड़ा करने की नींव रखी है। केजीएफ़ और पुष्पा से भी बड़ी आपराधिक दुनिया।
लेखक ने कैथी ड्रग्स सेगमेंट से कहानी को आगे बढ़ाया है और कहानी ने कुछ नए किरदारों को 70एमएम पर फेंका है। कमल हसन की 1986 में आई, एक्शन-थ्रिलर विक्रम के टाइटल किरदार अरुण कुमार विक्रम को इसमें स्पिन ऑफ किया है। इस किरदार के इर्दगिर्द कहानी चलती है।
विक्रम के सामने वेट्टी वागैयारा गिरोह का सरगना संधानम खड़ा नजर आता है जो अपने लापता माल की तलाश में भटक रहा होता है।
लोकेश ने कैथी के विस्तार को हॉलीवुड स्टाइल में स्क्रीन प्ले दिया है। पहले ही सीक्वेंस में डार्क नाईट का फील आता है। जब मास्क मैन कनन यानी कमल हसन को बंधक बना लेते है। उम्दा…यही डेटा वुसल है।
कहानी एकदम सिंपल और सीधी है लेकिन इसका एग्जीक्यूट, सिनेमाई शब्दों में कहे तो स्क्रीन प्ले थ्रिलिंग व ट्विस्ट एंड टर्न भरा है। जो अच्छे से बांधे रखता है। सीरियस माहौल में सिचुएशनल कॉमिक सीक्वेंस चेहरे पर हंसी देकर निकलते है। यक़ीनन, 2 घण्टे 51 मिनट बड़ा टाइम लाइन है। एडिटर फिल्मोमिन राज की जिम्मेवारी बनती थी, कि इसके शेप को ज्यादा शार्प किया जाता। एक्स्ट्रा और बेअसर फ्रेम्स को मुक्त कर देना चाहिए था।
स्क्रीन प्ले को हिंदी में डब डायलॉग मिले है और ठीक है। किरदारों के असल एसेंट मूल भाषा में सुनने को मिलेंगे।
अनिरुद्ध रविचंद्रन छोटी उम्र में बड़ा धमाका है, क्या बीजीएम बजाया है फ़िल्म देखने का मजा दुगुना कर देते है। कंटेंट के केंद्र में हर किरदार को अपनी थीम दी गई है। जब वे स्क्रीन पर आते है तब उनकी आहट थीम सुना जाती है।
प्रोडक्शन डिजाइन! कैथी को तमिल रीजनल सोच के साथ लिखा व सिल्वर स्क्रीन पर उतारा गया था। इसलिए उसका लेवल आम कंटेंट की तरह रखा लेकिन….लेकिन! विक्रम के साथ लेखक-निर्देशक का विजन बड़ा है, इसका डार्क डिजाइन हॉलीवुड स्टाइल में लिया है अभी इसके आगे भी विस्तार आएंगे।
कमल हसन! सबसे अव्वल उन्हें शानदार लुक मिला है। उन्होंने एक्शन सीक्वेंस को भी अच्छे से लिया है। छोटू एड़ी काटने आता है तब विक्रम का डायलॉग मस्त लगता है। 4 साल के गैप के बाद पर्दे पर वापसी की है असरदार है। कई जगह बुढ़ापे की छाप नजर आई है।
विजय सेतुपति! जिन्हें इस अभिनेता में एक्ट नजर न आता है तो कृपया संधानम के साथ विजय की मुलाकात देख ले। कंधे को टेढ़ा करके गोल्डन स्माइल गज़ब है। कमल के सामने विलन में विजय के अलावा सब फीके रहते। नीली गोली के बाद बॉडी ट्रांसफॉर्मेशन खूंखार रूप ले जाती है। तो बम की खबर के बाद ‘आवारा हूँ’ गीत को बीजीएम में बजाकर कॉमिक सिचुएशन में अलग ही दिखलाई दिए है। तीन पत्नियों के साथ तालमेल बिठाकर जीवन यापन सीखना हो तो इन्हें अवश्य देखे।
इस कलाकार की शक्ल, बॉडी न देखो। बल्कि इसके अंदर आते किरदारों को देखिए, कैसे अपनी बॉडी को उनके हवाले कर जाता है। एक्सप्रेशन तो हाई नोड पर रहता है। किरदार की जो रेंज है उठा ले जाता है।
फहाद फ़ाज़िल! कड़क एक्टिंग स्किल है इस कलाकार के अंदर, ब्लैक ऑपेरशन स्क्वाड परिवेश में चीफ एजेंट अमर से एकदम तेज-तर्रार अंदाज में मिले है। अगले सेगमेंट बीबी के पूछे जाने पर आप क्या काम करते है। तब हाव-भाव बेजोड़ है। अच्छा वेरिएशन है। भविष्य में इस कलाकार से बेहतरीन किरदार देखने को मिलेंगे।
वसंती! छोटा स्क्रीन प्रिजेंस है। लेकिन एजेंट टीना के साथ निर्मम प्रभाव छोड़ा है। इनके किरदार से बतलाया है कि खुफिया एजेंट किस रूप में मुस्तैद रहते है।
सूर्या! भाई की कैथी के कंटेंट में रोलेक्स सर्वेसर्वा है। 5 मिनट के कैमियो धांसू है बाबा, अगली कड़ी का निमंत्रण दे डाला है। कि अब सिनेमा रोलेक्स पहनेगा और रोलेक्स के साम्राज्य से रूबरू करवाएगा।
संधानम के गैंग में छोटा पैकेट तुरन्त प्रभाव से ध्यान अपनी ओर आकर्षित करता है।
बाकी सब ने अच्छा किया है। बच्चे के एक्सप्रेशन ठीक लिए है।
गिरीश गंगाधरन ने लोकेश के विजन को बेहतर कैद किया है। एक्शन सीक्वेंस में तो कमाल कर गए है। कई सीक्वेंस को रिवाइंड करके देखें जा सकते है। वीएफएक्स से धमाके भी प्रभावी बन पड़े है। क्लाइमैक्स में मामला जमा दिया है।
लोकेश को अच्छे से मालूम है उन्हें क्या करना है और कैसा ट्रीटमेंट रखना है इससे दर्शक कनेक्ट होंगे। तभी तो देखिए इस साल विक्रम तमिल की सबसे बड़ी हिट रही है। लोकेश का नैरेशन व एक्शन सीक्वेंस काबिले तारीफ है। फ़िल्म की सफलता बतलाती है कि दर्शकों के बीच क्या स्टेटस रहा है।
तीन बेहतरीन कलाकारों का अद्भुत सिनेमाई संगम है।
कमल हसन और लोकेश ने अपनी फिल्म को अच्छे से प्रमोट न किया। इसे अच्छे प्रमोशनल स्केल मिलना चाहिए था। ताकि नॉर्थ में ज्यादा बेहतर करती। अब कन्नड़ और तमिल में क्राइम यूनिवर्स क्रिएट किया जा चुका है। दोनों की कहानी अमेरिका निकल पड़ी है।
विक्रम हॉलीवुड स्टाइल में शानदार ट्रीटमेंट एंड एग्जीक्यूशन है। भारत में अब ऐसे कंटेंट देखने को मिलते रहेंगे। लोकेश अलग ही लाइन खींच रहे है।
भैया, विक्रम से मिलने जाओ, तो कृपया कैथी को साथ अवश्य ले जाए। वरना लौटकर कहेंगे कि क्या दिखला दिया है। गालियां देंगे। कैथी के साथ जबरदस्त राइड है….विक्रम। फिर भी मजा न आए। तो भिया आप हीरोपंती और राष्ट्रकवच ओम देखिए, राहत मिलेगी।
रिव्यु एक महीने देरी से चल रहा है। क्योंकि नज़दीकी सिनेमाघरों के प्लेटफॉर्म पर विक्रम पहुँची थी। तब बैठ न सका, अब हॉटस्टार पर बैठा हूँ और पेश है।

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