Home विषयजाति धर्मईश्वर भक्ति आस्तिक महानायक महायोगी भगवान कृष्ण रूप में पूजते हैं

आस्तिक महानायक महायोगी भगवान कृष्ण रूप में पूजते हैं

रंजना सिंह

by रंजना सिंह
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हजारों वर्षों उपरान्त आज भी हम आस्तिक जिन्हें महानायक महायोगी भगवान कृष्ण रूप में पूजते हैं और अनन्त काल तक सनातनी पूजते रहेंगे, उनके जीवनकाल में केवल वे ही सौभाग्यशाली उन्हें पहचान और पूज पाए थे जिनके हृदय में सत का प्रकाश था,जिनमें उन्हें समझ जान पाने,उनके विराट रूप को पहचान पाने का सामर्थ्य था,,अन्यथा कंस शिशुपाल कौरवभाई जरासंध आदि असंख्यों असंख्य जनों की कमी नहीं थी जिन्होंने उनसे इतनी घृणा रखी कि ऐसे कोई उपाय नहीं छोड़े जिससे वे कृष्ण का वध अथवा उन्हें हानि पहुँचा सकते थे।

कुछ अभागे ऐसे भी थे जिनमें ज्ञान था,किन्तु फिर भी भक्ति और समर्पण भाव न होने के कारण वे कृष्ण के शरणागत न हो पाए थे और इसका पश्चाताप करते वे अन्तिम समय में सँसार से गए।

कृष्ण हमारे नायक,हमारे इष्ट पूज्य क्यों हैं?? क्योंकि उन्होंने दिखाया कि जन्म से प्रयाण तक पग पग केवल कष्ट कण्टक पाकर भी समाज राष्ट्र और विश्व को कैसे स्नेह मुस्कान गीत संगीत ज्ञान सद्धर्म शौर्य ऊर्जा आशा विश्वास साहस और सन्तोष दिया जा सकता है।कैसे धर्मपथ पर अडिग रहा जा सकता है।कैसे विश्वकल्याण किया जा सकता है।कैसे पग पग विष पीकर अमृत वर्षा किया जा सकता है।एक बालक, युवा, नेता, राजनीतिज्ञ युगद्रष्टा और धर्मस्थापना मार्ग में क्रूर निर्मोही हुआ जा सकता है,जो पथभ्रष्ट अपने सम्पूर्ण कुल को अपनी आँखों के सामने समाप्त होते देख सकता है तो अपनी पुत्रवधु उत्तरा के गर्भ में प्रविष्ट हो ब्रह्मास्त्र का प्रहार अपने ऊपर ले सकता है।

धर्म के पाँचों स्तंभों को बचाने हेतु महासमर में साधारण सारथी बन रथ हाँक सकता है,घोड़ों को दाना पानी खिला सकता है।गौ धरा और स्त्री का मान कैसे अक्षुण्ण रखा जा सकता है और इनका अपमान ही धर्मच्युतता है,भली प्रकार इसी नायक ने तो समझाया।

जिसके जन्म के पूर्व ही उसकी मृत्यु निश्चित कर दी गयी हो वह सक्षम महावीर समस्त प्रहारों बाधाओं को पार कर तलवे में लगे एक सामान्य बाण को सम्मान देते प्राण तिरोहित कर दे,, ऐसी सरलता किस नायक में होगी? हम तो उस नायक के बाललीलाओं पर, युवावस्था के चपलताओं पर, उसके रणछोड़ रूप पर ही नहीं मोहते, जिस सरलता से वे शापों को शिरोधार्य करते हैं,जैसे प्रयाण करते हैं,,उसपर भी सम्मोहित नतमस्तक होते हैं।

हे कृष्ण,आपसे करबद्ध याचना- हम सनातनियों के हृदय में बस हमें निष्कलुष कीजिये, हम धर्ममार्ग पर चलें इसका सामर्थ्य दीजिये,हम विचलित न हों,गिर न पड़ें, हमारी कलाई थामिए,काम क्रोध लोभ मोह अंहकार से आप्त हमारे हृदय के अन्धकारागार में प्रकट होइए प्रभु और इसे प्रकाशित कीजिये।
!!जय जय श्री कृष्ण!!

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