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को नहीं जानत है जग में कपि, संकटमोचन नाम तिहारो..

by Jalaj Kumar Mishra
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को नहीं जानत है जग में कपि, संकटमोचन नाम तिहारो..

हिन्दुस्तान और सनातन धर्म संस्कृति में भक्ति और भक्त के आचरण की जब भी बात होती है,हनुमान जी का चरित्र सबसे प्रिय लगता है। हनुमान जी को लिखते समय तुलसी बाबा खुद भक्त की‌ भाँति प्रतीत होतें हैं। अब देखिए न, हनुमान जी लंका को जला कर आते है, चहूँओर सब कोई उनकी तारीफ कर रहा है और उस समय वे कहते है कि
सो सब तव प्रताप रघुराई। नाथ न कछू मोरि प्रभुताई॥
यह सब जो भी मेरे द्वारा सिद्ध हुआ है, वह प्रभु श्रीराम का का प्रताप है। हे प्रभु! इसमें मेरी बड़ाई जैसा कुछ भी नहीं है।
हनुमान जी इस कलयुग जीवन देने वाली अमृत रुपी औषधि के समान हैं, जिनकी उपासना से हर भक्त में ऊर्जा का संचार होता है और वह अपने ध्येय को प्राप्त करने में सफल होता है।
वह कहते है न कि भक्ति में संपूर्ण समर्पित मनोभाव होना आवश्यक है। इसमें कोई अगर मगर कि गुंजाइश नही होती है। भरोसा तो वैसा होना चाहिए जैसे जब हम बच्चों को हवा में उछालते है और वह हँसता है क्योंकि उसे यकीन होता है, उसको संभालने वाला उसके साथ खड़ा है।
रामचरित मानस के अनुसार एक और कथा सामने आती है। बाबा लिखते है कि जब प्रभु श्री रामजी, लक्ष्मण और सीता सहित अयोध्या लौट आए तो एक दिन हनुमान जी माता सीता के कक्ष में पहुँचे। उन्होंने देखा कि माता सीता भखरे रंग की कोई चीज मांग में सजा रही हैं। हनुमान जी ने उत्सुक हो माता सीता से पूछा यह क्या है जो आप मांग में सजा रही हैं। माता सीता ने कहा यह सौभाग्य का प्रतीक सिंदूर है। इसे मांग में सजाने से मुझे राम जी का स्नेह प्राप्त होता है और उनकी आयु लंबी होती है। यह सुन कर हनुमान जी से रहा न गया ओर उन्होंने अपने पूरे शरीर को सिंदूर से रंग लिया तथा मन ही मन विचार करने लगे इससे तो मेरे प्रभु श्रीराम की आयु ओर लम्बी हो जाएगी ओर वह मुझे अति स्नेह भी करेंगे। सिंदूर लगे हनुमान जी प्रभु राम जी की सभा में चले गए। राम जी ने जब हनुमान को इस रुप में देखा तो हैरान रह गए। राम जी ने जब हनुमान से पूरे शरीर में सिंदूर लेपन करने का कारण पूछा तब हनुमान जी ने साफ-साफ कह दिया कि इससे आप अमर हो जाएंगे और मुझे भी माता सीता की तरह आपका स्नेह मिलेगा। हनुमान जी की इस बात को सुनकर राम जी भाव विभोर हो गए और हनुमान जी को गले से लगा लिया। उस समय से ही हनुमान जी को सिंदूर अति प्रिय है और उनकी प्रतिमा पर सिन्दूर चढ़ाया जाता हैं।
किसी भी प्रकार का कैसा भी बड़ा और भीषण संकट हो, हनुमान जी सदा सहाय रहते हैं। बाबा लिखते है कि हनुमान जी हर बाधा का नाश करने वाले है, हर संकटों का अंत करने वाले है। अगर आपके जीवन में एक के बाद एक समस्याएं आ रही हो तो भगवान हनुमान जी की शरण में अवश्य आएं। संकट मोचन महाबली हनुमान जी अपनी शरण में आने वाले भक्तों के सभी कष्टों का निवारण कर देते हैं।
आज हनुमान जयंती है। आप सभी मित्रों को हनुमान जयंती की हार्दिक

बधाई

और मंगलकामना। आप सभी का स्वास्थ्य बना रहे इसी कामना के साथ वह कहते है न कि को नहीं जानत है जग में कपि, संकटमोचन नाम तिहारो।

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