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योगी जी का पर्चा दाखिला

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कल योगी जी का पर्चा दाखिला था। संयोग से मैं गोलघर की एक कपड़े की दुकान पर कुछ कपड़े खरीद रहा था। मेरे बराबर में एक सज्जन एक सफेद जैकेट पहन कर आईने से पूछ रहे थे कि “कैसा लग रहा हूं मैं?” मुझे कुछ देर में महसूस हुआ कि आईने के साथ एक अदद आदमी भी चाहिए होता है जो सामने वाले के कान में कुछ कर्णप्रिय बोल दे। सो मैंने बोला- “बहुत सुन्दर लग रही है आप पर जैकेट।” प्रसन्नता उपरांत मैंने उनके मुखमंडल पर स्वाभाविक प्रसन्नता देखी। उन्होंने आगे बढ़कर बताया कि जैकेट तो तमाम है लेकिन ससुराल में शादी है इसलिए सफेद जैकेट खरीदने का मन बनाया। अब मैंने और गहरी प्रशंसा झोंकी। मैंने कहा कि चुनाव का वक्त है शहर भी शिमला बना हुआ है इसमें आपकी सफेद जैकेट! कयामत है बस।

 

हांलांकि मेरी इस बात पर उन्होंने बताया कि राजनीति उनके लिए निषेध है क्योंकी आगामी चुनाव में वो पीठासीन अधिकारी बने हैं।
खैर! पर्चा दाखिलों के नारों के बीच उन्होंने फूल के प्रति अपने समर्पण, प्रतिबद्धता एवं प्रेम को खुले हृदय से स्वीकारा।
इन्हीं छिटपुट बातों में दुकान का मालिक अंदर आया और ग्राहकों से कहने लगा कि “जिसकी गाड़ी बाहर खड़ी है जल्दी हटा ले। महाराज जी का काफिला आ रहा है इसलिए प्रशासन द्वारा गाड़ियां उठायी जा रहीं हैं। अब जो जहां था वहीं से अपनी गाड़ी की तरफ भगा। मेरी एक्टिवा इतनी किनारे थी जो रास्ते में रुकावट जैसी बाधा से मुक्त थी। लेकिन पीठासीन अधिकारी की कार उनके पहुंचने से पहले क्रेन द्वारा गिरफ्तार कर के कारागार भेजी जा चुकी थी।
अब भाईसाहब के हाथ में गाड़ी की चाबी और तनबदन में भीषण आग धधक रही थी। अब न तो उन्हें पर्चा दाखिला भा रहा था न ही उन्हें अपने जैकेट की परवाह थी।
हां इतना जरुर हुआ कि दुकान में वो 350+ की बात कर रहे थे लेकिन गाड़ी उठने के बाद अपने जिले से लगायत पूरे उत्तर प्रदेश में उन्होंने अपने प्रिय पार्टी को कुल 50 सीटों में निपटा दिया।
दरअसल यही होता है आम आदमी। जो व्यक्तिगत नुकसान का बर्दाश्त नहीं कर पाता। जो किसी की शादी में सज-संवर कर जा रहा हो और फिसल कर गिर जाये तो वह दुल्हे और उसके बाप तक को पांच-सात गाली देकर अपने क्षति की पूर्ति और गुस्से पर पानी की छींटे डालकर चैन लेता है।
इन सब के बावजूद मेरी पूरी संवेदना पीठासीन अधिकारी और उनकी गाड़ी के साथ है क्योंकि जैकेट पर 40 प्रतिशत डिस्काउंट सुनकर वो 1000 का डीजल फूंककर एक जनपद से दूसरे जनपद आये थे… अब जैकेट पर डीज़ल और गाड़ी का चालान जुड़ने के बाद जैकेट का जो रेट उतरा होगा वो किसी भी पार्टी को सत्ता से बेदखल करने के लिए पर्याप्त है।

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