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रक्षाबंधन टीज़र रिव्यु

Om Lavaniya

by ओम लवानिया
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21 जून यानी आज अक्खे कुमार की नई और साल की तीसरी फिलिम रक्षा बंधन शाम 5.40 पर दर्शकों के बीच ट्रेलर छोड़कर जाएगा। फ़िल्म निर्माता-निर्देशक आनंद एल राय के निर्देशन में आ रही है।
ट्रेलर से पहले अक्की के फैंस खासे नाराज दिखलाई दे रहे है और अपने हीरो से पूछ रहे है कि रक्षा बंधन का हश्र भी पृथ्वीराज जैसा रहेगा।
इन सबके के बीच मेरी जिज्ञासा है कि रक्षा बंधन व पृथ्वीराज के लिए जिन मूछों का उपयोग किया गया है उसमें थोड़ी बहुत वेरिएशन है या यहाँ भी मामला सपाट रखा है। एक ही मूछ विग से दोनों किरदार निपटा दिए।
लाल सिंह और रक्षाबंधन में क्लेश होना तय हुआ है। छोटू ने खूब कोशिश की सोलो आने के लिए, आदिपुरुष को 2023 में शिफ्ट करवा दिया। लेकिन क्लेश तो है और ऐसे में मेरा समर्थन रक्षाबंधन को रहेगा। लाल सिंह को धोबी पछाड़ पड़नी चाहिए। पोस्ट कोई समीक्षक न लिख रहा है बल्कि फिल्मी प्रेमी द्वारा कलमबद्ध है।
उधर, सदी के महा-हहईई और शारुक खान डॉन 3 में दिखलाई देंगे, ऐसा सूत्र लग रहे है। फरहान अख्तर स्क्रिप्ट लिखने में व्यस्त है हालांकि उनकी नजर देश के हालातों पर भी टिकी हुई है, अलग बात है कि जनाकारी के मामले शून्य हो। लेकिन विरोध का झंडा तो बुलंद करके बैठते है।
समझ न आ रहा है डॉन 3 लिखकर, फिर उसे हेवी बजट में फिल्माएंगे। इतनी मेहनत के बाद नतीजा….भक्तों के तूफ़ान में उड़ जाएगा। दरअसल, जबसे मुखोटे उतरे है न, दिल से उतर गए है लोग। वरना फरहान अख्तर प्रतिभवान लेखक-निर्देशक है। परन्तु एकतरफा और एजेंडे व टूलकिट क्लब जॉइन करने या कहे मुखौटा उतरने के बाद प्रतिभा ने दम तोड़ दिया है। ऐसे परिवेश में ऑस्कर भी जीत ले। तब भी खुशी न होगी।
देश प्रथम है जो देश प्रेमी है उसको समर्थन है और रहेगा…नहीं है टाटा बाय बाय…ख़त्म। डॉन 2 पहले दिन पहला शो देखी थी। डॉन 3 की वैलिडिटी खत्म हो गई है।
रक्षाबंधन! निर्माता-निर्देशक आनंद एल राय और लेखक हिमांशु शर्मा शाहरुख खान के साथ जीरो के फेर में फंसे है मामला उल्टा बन पड़ा। तब से करियर को हिट देने की कोशिश में लगे है।
अक्षय कुमार के साथ फैमिली ड्रामा रक्षाबंधन लेकर हाजिर हुए है, कंटेंट की थीम सुनील शेट्टी अन्ना की क्रोध से मेल खाती है। हालांकि उसका प्लॉट एंग्री यंग मैन स्टाइल में था, जबकि रक्षा बंधन कॉमिक जॉनर में है।
ट्रेलर ठीक-ठाक है कॉमिक और इमोशनल टच दिया गया है। लेकिन अक्खे कुमार की पिछली फिल्म का किरदार और इसे मैच कर लो। कोई वेरिएशन न मिला है। बस इसमें इमोशनल सीक्वेंस एक्स्ट्रा है, बाक़ी एक्सप्रेशन वही ठाक के तीन पात रहे है।
अक्खे और भूमि को देखकर टॉयलेट एक प्रेम कथा वाली फील आई।
डाइलॉग में किडनी वाला संवाद सुनकर हेरा फेरी 2 याद आ गई। सोचा अब बाबू भैया और श्याम राजू को समझाएंगे।

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