Home लेखकMann Jee ज्वाला देवी मंदिर – भाग 1

ज्वाला देवी मंदिर – भाग 1

Mann Jee

by Mann Jee
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ज्वाला जी मंदिर काँगड़ा हिमाचल में स्थित एक शक्ति पीठ है। लोग कहते है अकबर ने इस पवित्र मंदिर की अखंड ज्योति को बुझाने के लिए लोहे की डिस्क से ढकवाया , पानी से बुझाने की कोशिश की आदि आदि। जब वो असफल रहा तो उसने एक स्वर्ण छत्र भेंट किया जो बाद में किसी और धातु में बदल गया। आज भी ये छत्र मंदिर में रखा है। इस कहानी की कितनी सच्चाई है – उसकी सत्यता मुग़लिया दस्तावेजों से ही जांचेंगे और आप स्वयं फैसला कीजिये सत्य क्या है और झूठ क्या।

जहांगीर – घंटे वाला बेवड़ा बादशाह ने यहाँ १६२० में फ़तेह हासिल की और १६२२ में नूरजहां के साथ आया। काँगड़ा किले में उसने खुत्बा पढ़वाया , गाय की कुर्बानी दी । यहाँ उसने एक मस्जिद भी बनवाई। अपनी आत्मकथा में जहांगीर आगे लिखता है कि पहले यहाँ एक शिवलिंग भी था जिसे मजहब के लोगो ने नदी में फेंक दिया था ( कदाचित वो तुग़लक़ के समय की बात कह रहा है । जहांगीर इधर सल्फर – गंधक की ख़ाने होने की बात करता है। लिखता है भवन ( कदाचित भवानी) के इस मंदिर में अखंड ज्वाला प्रज्वलित रहती है और इधर कई काफिर पूजा करने के लिए हुजूम में आते है।

अपनी आत्म कथा तुजुक ऐ जहांगीरी अथवा जहांगीरनामा में एक बार भी जहांगीर ने कही नहीं लिखा काँगड़ा में उसके अब्बा अकबर ने कोई छत्र आदि कभी चढ़ाया हो। बल्कि जहांगीर वहां एक मस्जिद बनवाता है ( किले में – कदाचित वो भूकंप से कालांतर में नष्ट हुई – ऐसा कई जगह उल्लेख है ) और गौकशी करता है। केवल इतना लिखा है – अकबर ने कोशिश की थी इस किले को जीतने की लेकिन दुसरे जरुरी काम से फ़ौज कही और चली गयी थी।

सबूतजीवियो के लिए किताब के पन्ने अटैच्ड है पोस्ट में – हाईलाइट किये हुए। तो ये हुआ जहांगीरी काल का ऑथेंटिक सोर्स। अगले पार्ट में देखेंगे अकबरी काल के ऑथेंटिक सोर्स।

अंत में – मुझे एक बात समझ नहीं आती : अकबर ने छत्र चढ़ाया लेकिन पहले क्या टेस्टिंग कर रहा था अखंड ज्योति की ? मतलब अकबर को महान बताना है लेकिन इस बात को हाईलाइट भी नहीं करना कि उसने मंदिर और अखंड ज्योत को क्षति पहुंचाने की कोशिश की थी !

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