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Virtual Private Network (VPN) के उपयोग

Vivek Umrao

by Umrao Vivek Samajik Yayavar
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दुनिया में लगभग आठ अरब लोग हैं, जिनमें से लगभग सवा-पांच अरब लोग इंटरनेट प्रयोग करते हैं, लगभग सवा-एक अरब लोग VPN का प्रयोग करते हैं। यह पोस्ट वही लोग समझ सकते हैं जिन्हें VPN की ठीकठाक समझ है, न कि केवल उपभोक्ता।
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VPN का अधिकतर प्रयोग इसलिए किया जाता है ताकि सुरक्षित तरीके से अपनी कंपनी के साथ जुड़कर व विदेशों में अपनी कंपनी के कस्टमरों के साथ सुरक्षित तरीके से जुड़कर काम करते रह सकें।
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कुछ उपभोक्ता मेरे जैसे भी होते हैं जिनको लेखन, प्रकाशन, चिंतन, जर्नलिज्म इत्यादि के लिए जियो-लोकेशन प्रतिबंधित सामग्री को पढ़ना होता है, एक्सेस करना होता है तो वर्चुअली उस देश के अंदर पहुंच कर सामग्री को एक्सेस कर लेते हैं। VPN का प्रयोग साइबर-सुरक्षा का भी काम करता है।
भारत में लगभग 27 करोड़ उपभोक्ता VPN प्रयोग करते हैं। कुछ लोगों ने दो या तीन कंपनियों से कनेक्शन ले रखे होंगे तो मोटा-मोटी भारत में लगभग 10-15 करोड़ लोग VPN का प्रयोग करते हैं। जब से वर्क फ्राम होम शुरू हुआ है तब से भारत में बढ़ती हुई संख्या में लाखों-करोड़ों और लोगों ने VPN का प्रयोग शुरू किया है।
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भारत सरकार की नई गाइडलाइन के अंतर्गत भारत में VPN का प्रयोग प्रतिबंधित हो गया है। भारत से सभी बड़ी VPN कंपनियों ने अपने सर्वर हटाने व कार्यालय बंद करना शुरू कर दिया है, अनेक कंपनियां तो बंद भी कर चुकी हैं। जाहिर है कि जो भी साफ्टवेयर/हार्डवेयर इंजीनियर लोग इन कंपनियों के कार्यालयों व सर्वर-केंद्रों में नौकरियां कर रहे थे, उनको भारी नुकसान हुआ है। इसके अलावा संबद्ध पूरे आर्थिक-चक्र को भी नुकसान होना है।
भारत सरकार का कहना है कि ऐसा वह सुरक्षा के लिए कर रही है। लेकिन जिन नीतियों के कारण VPN कंपनियां भारत छोड़ रही हैं, उन नीतियों में प्रतिबंध केवल इंडिविजुअल्स के लिए है, कारपोरेट व इंटरप्राइजेज इत्यादि के लिए नहीं। प्रथम दृष्टया इससे तो यही दीखता है कि भारत सरकार इंडिविजुअल्स के ऊपर जासूसी करना चाहती है अपना नियंत्रण स्थापित करना चाहती है।
दुनिया में केवल कुछ ही देश ऐसे हैं जहां VPN या तो पूरी तरह से ब्लॉक्ड है या प्रतिबंधित है, देखते हैं कि ये देश कौन हैं। (क्यूबा को नहीं जोड़ रहा हूं क्योंकि क्यूबा में तो इंटरनेट का ही प्रयोग प्रतिबंधित है)।
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वे देश जिन्होंने VPN को ब्लॉक कर रखा है ::
बेलारूस,
इराक,
ओमान,
तुर्कमेनिस्तान,
उत्तरी-कोरिया
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वे देश जिन्होंने VPN का प्रयोग प्रतिबंधित कर रखा है ::
रूस,
चीन,
ईरान,
टर्की,
संयुक्त अरब अमीरात (यूएई)
देखा जाए तो दुनिया में साम्यवादी-पार्टी सरकारों वाले सभी देशों में बिना अपवाद इंटरनेट व VPN का प्रयोग प्रतिबंधित है। (रूस की कठपुतली सरकारों वाले देशों को भी जोड़ते हुए)। साम्यवादी-पार्टी टाइप सरकारों वाले देशों में प्रतिबंध तो समझ में आता है क्योंकि लोगों को दुनिया से काटे रखना होता है, दुनिया के लोग जमीनी हकीकत न जान पाएं इसलिए अपने देश के आम लोगों पर प्रतिबंध लगाना पड़ता है ताकि हकीकत के बारे में दुनिया से चर्चा न कर पाएं और सरकारों द्वारा दिए गए फर्जी आकड़ों व दावों पर सवाल न खड़ा हो। लोगों का ब्रेनवाश न टूटने पाए।
लेकिन समझ में यह नहीं आता है कि ऐसा क्या है कि भारत जैसे लोकतांत्रिक देश में ऐसा करना पड़ रहा है। देश के लोग अपने निजी जीवन में क्या कर रहे हैं, क्या सोच रहे हैं, मुद्दों पर क्या विचार रख रहे हैं, इत्यादि-इत्यादि पर भारत सरकार नियंत्रण क्यों करना चाहती है। हर चीज को सुरक्षा के नाम पर जस्टिफाई नहीं किया जा सकता है। दुनिया में ऐसे बहुत देश हैं जिनको भारत की तुलना में बहुत अधिक खतरे हैं, लेकिन वे देश तो अपने देश के लोगों की जासूसी करने को सुरक्षा के नाम पर जस्टिफाई नहीं करते हैं।
खैर 27 जून से भारत भी दुनिया के उन गिने-चुने देशों की सूची में शामिल हो चुका है, जहां VPN प्रतिबंधित है। अभी तो VPN कंपनियां भारत में अपने सर्वर बंद कर रही हैं, लेकिन भारत के लोगों को सुविधा दे रहीं हैं कि लोग वर्चुअल-सर्वर के द्वारा VPN प्रयोग कर सकें। लेकिन भारत सरकार कह रही है कि नई नीतियां भारत के अंदर VPN सुविधा प्रयोग करने वाले इंडिविजुअल्स पर भी लागू होंगी। देखना यह है कि भारत सरकार वर्चुअल-लोकेशन-सर्वर को कैसे प्रतिबंधित करती है। वेबसाइट ब्लाक करना टटपुंजिया काम है, लेकिन वर्चुअल सर्वर कैसे ब्लाक करेगी, यह भविष्य ही बताएगा।
रूस जो इस मामले में दुनिया के सबसे हाईटेक देशों में है, वह तो वर्चुअल-लोकेशन-सर्वर को प्रतिबंधित कर नहीं पाया है, जबकि यूक्रेन पर युद्ध छेड़ने के बाद पूरा जोर लगा दिया है, ताकि रूस के आम लोगों के पास सही खबरें न जा सकें और रूस के लोग खुलकर अपनी बात न कर सकें। जो लोग रूस के अंदर रहते हैं, वे भले ही फेसबुक इत्यादि का प्रयोग करने के लिए VPN का प्रयोग करें लेकिन पुतिन के खिलाफ कुछ भी लिखने की सोचने तक की हिम्मत नहीं कर सकते हैं (जो बहुत ही बहादुर लोग हैं, उन अपवादों को छोड़), उल्टे पुतिन के समर्थन में ही बात करेंगे ताकि अपनी सुरक्षा व सुविधा सुरक्षित किए रहें।
भारत सरकार की नीतियों से नुकसान सिर्फ भारत के अंदर के लोगों का ही होना है। जो लोग भारत से बाहर हैं, उनको फर्क नहीं पड़ने वाला है, वे भारत को वर्चुअल-लोकेशन-

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