Home हास्य व्यंग कबाब में हड्डी | प्रारब्ध

कबाब में हड्डी | प्रारब्ध

Author : Nitin Tripathi

by Nitin Tripathi
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बचपन में पूरे मुहल्ले में एक ही फ़ोन होता था जो हमारे घर में था. उसी पर पूरे मुहल्ले के मेसेज आते थे. एक बार फ़ोन बजता कोई उठाता तो तुरंत कट जाता. मैंने उठाया हेलो कौन बोल रहा है तो उधर से एक मैडम बोलीं. उन्हें लगा यह तो बच्चा है. बच्चे दिल के सच्चे अक़्ल के कच्चे. मैडम ने बहुत प्यार से बात की और बोला कि पड़ोस वाले रिंकू भैय्या को बता देना प्रिया भाभी का फ़ोन आया था, मोती महल में कल बारह बजे मिलें.
फ़िर. फ़िर क्या अब रिंकू भैय्या अपने क़ब्ज़े में.
प्रिया भाभी को तो रिंकू भैय्या एक बार मोती महल ले गए, इधर जब बर्गर छोले भटूरे दोसे खाने हों / दोस्तों को खिलाने हों रिंकू भैय्या के घर पहुँचते और यूँ ही बात चीत में उनके पापा से बताने लगते आज कल मोती महल बहुत अच्छा चल रहा है. रिंकू भैय्या तुरंत अवतरित हो जाते और हमें लेकर बाहर निकल लेते मोती महल. कभी कभार वह ऐंठने लगते तो हम दिल पिक्चर का गाना ज़ोर से गाने लगते ओ प्रिया प्रिया. रिंकू भैय्या तुरंत हाथ जोड़ने लगते.
अंत तक तो अपनी कोई भी मुसीबत होती रिंकू भैय्या पर डाल देते. टीन एज आ रही थी, माधुरी दीक्षित का बहुत बड़ा पोस्टर अपने कमरे में हमने
लगाया. पिता जी ने देखा तो बहुत नाराज़ हुवे ये क्या बेहूदगी है. हमारा उत्तर – रिंकू भैय्या लगा गए. उन्हें बुलाया गया, वह चौक गए मैंने कब लगाया यह. मैंने तुरंत जवाब दिया आप ही तो कह रहे थे वो दिल पिक्चर में प्रिया का रोल करने वाली हीरोईन का पोस्टर लाए हैं. रिंकू भैय्या बेचारे चुप, खूब डाँट खाए.
प्रिया भाभी शायद एक ही बार रिंकू भैय्या के साथ रेस्टोरेंट गई होंगी पर उन्होंने हमारी पूरी पढ़ाई भर के लिए खाने पीने डाँट से बचने का इंतज़ाम कर दिया था. वह जहां कहीं भी हों अपने पति बाल बच्चों के साथ उनको दुवाएँ पहुँचे.

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