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नोकिया_और_हिंदू

देवेन्द्र सिकरवार

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कुछ वर्ष पूर्व Microsoft द्वारा नोकिया के अधिग्रहण की घोषणा करने के लिए प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान, नोकिया के सीईओ ने यह कहते हुए अपना भाषण समाप्त किया-


हमने कुछ भी गलत नहीं किया, लेकिन किसी तरह, हम हार गए”।


कारण बस एक था नोकिया बदलती दुनियाँ में नया सीख नहीं सका , स्वयं को नई चुनौतियों में ढाल नहीं सका। हिंदुओं के साथ भी पिछले 1200 साल से हो रहा है पर सीखने को तैयार नहीं।


-पहले खुरासान गया, हम नहीं सीखे कि इस्लाम की तकनीक क्या है?

– फिर वंक्षु से गजनी तक का क्षेत्र गया, हम कुछ नहीं समझे।

-फिर सिंध, पंजाब, काबुल व कश्मीर गया हम आंखों पर पट्टी चढ़ाए बैठे रहे।

-आज केरल और बंगाल अलग होने की कगार पर हैं पर हमें अभी भी होश नहीं है।


इसके बाद जब कोई यह कहता है कि हमारे सनातन को कोई नहीं मिटा सकता और सनातन में ‘घर वापसी’ से वर्णसंकरता बढ़ेगी, तब बाई गॉड उसे थपड़ियाने का मन करता है और टर्मिनेट करने का भी चाहे वो फेसबुकिया हो या चरबीगोले मठाधीश।


कम्बख्त कहीं के!

अधिग्रहण पर अधिग्रहण हो रहा है लेकिन नए युग के अनुरूप ढलने और सीखने से परहेज है, काहे कि हम सनातन हैं।

बकलोल कहीं के।

अभी योगी मोदी को हट जाने दो, पीएफआई के हाथों तुम्हारे मठों को भी मस्जिदों में बदलते देर नहीं लगेगी।
तुम भी नोकिया बन जाओगे।

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