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History of Lucknow City

by Praarabdh Desk
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लखनऊ ऐसा शहर जो निर्माणशैली, खंडहरों और लाखौरी ईंटो के लिए जाना जाता है बाद के शासकों, नवाबों , अंगेजो के बारे में सब जानते है और उनके द्वारा बनवाए गए भवनों और महलों के बारे में भी …
लेकीन…. एक सवाल..!
मुगलों नवाबों और अंग्रेजो से पहले यहां कौन थे…? किसका निवास था …?
किसके किले थे……..?
किसके बनवाए गए किले के अवशेष थे…?
उत्तर है : पासी जाति का…✓
हजारों साल पहले लखनऊ और अवध में बाहुबली पासियो का शासन था, जिनका संघर्ष बाहर से आने वाले राजपूतों जातियों तथा मुस्लिम अकर्मणकारियो से हुआ, लगातार बिकट टकरावों से पासी कमजोर होते गए अंत में अवध में सत्ता से बेदखल हो गए ,,,, पर उससे पहले उनके द्वारा बनवाए गए किले, तालाब, मंदिर वैसे के वैसे ही रहे , पर कुछ को मलेच्छो द्वारा ध्वस्त- मटियामेट जरुर कर दिया जाते, पर जनमानस में उनके असली हकदारो के नाम तरानों के रुप में लोगो के यादाश्तो में बसे रहे
जिनमे सबसे शक्तिशाली पासी राजा बिजली की बात होती है जिसके बारह किले थे लखनऊ में, यह बात पुरातत्व विभाग के अभिलेखों तथा ब्रिटिश रिकॉर्ड में दर्ज है —ref.oudh gazzetter, Lucknow settlement report..etc
कहा जाता है कि इस शहर की स्थापना बिजली राजा, से हुई थी जो एक पासी था, जिसने बिजनौर के उत्तर में लगभग एक मील की दूरी पर नथावन के महान किले का निर्माण किया; काफी हद तक एक ऊंचा टीला और विस्तृत मैदानों से आकर्षक दिखने वाला, जिसमें यह स्थित है, अभी भी इसकी साइट को चिह्नित करता है। कहा जाता है कि इस राजा के पास 12 किले थे, जिनमें से कल्ली पच्छिम, माती, परवर-पश्चिम , परवर- पूरब, परगना बिजनौर के पूर्व में स्थित थे, गढ़ी किनौरा, भटगांव, दादुपुर तथा कुछ किलो के नाम भुला दिए गए है, लेकिन जो उत्तर-पूर्व में सरसावां और गोमती नदी तक फैले हुए थे।
( आजादी से पहले 1944 के भूगोल के किताब में बिजनौर शहर की स्थापना बिजली पासी द्वारा किया गया था ऐसा भी पढ़ाया जाता था )
आज़ादी के बाद पासियो द्वारा कड़े संघर्ष के बाद दो- तीन किलो को संरक्षित करा भी लिया गया है पर अभी बहुत बाकि है समाज को संज्ञान लेना चाहिए
अब जानते है वर्तमान में महाराजा बिजली पासी किला संरक्षित है उसका पुराने लेखों में किला जलालाबाद नाम दर्ज है ऐसा क्यों – तो बताऊं अंग्रेजो ने माना है 12 सदी के बाद पासियो का राजपाट खतम हो गया तब उनके जगहों पर बाद के शासकों ने खुद को आबाद किया उसी क्रम में नवाबी समय में बिजली पासी का दुर्ग मीरबिन कासिम के हाथों लगा। उसने इस किले को अपने दामाद जलालुद्दीन को बतौर नजराना दे दिया जिसके बाद किला जलालाबाद नाम पड़ा । उसने इस दुर्ग को नए सिरे से मरम्मत करवा कर यहां सैनिक अड्डा आबाद किया । अर्थात् बिजली पासी का दुर्ग आगे भी दुर्ग जैसा काम आया।
इस किले के आसपास पासियों के गझिन आबादी वाले गांव पाए जाते है जिनके पुराने परंपरा में शादी ब्याह के अवसर पर इस टीले पर जाकर जंगली शूकर के बच्चे की बलि देकर पुरखो को श्राद्ध प्रकट करते थे और यही चीज़ अंग्रेजो ने अपने दस्तावेजों में लिखा है कि – पासी लोगो की इन डीह/टीलो पर गहरी आस्था हैं
1857 में इस किले को अंग्रेजो द्वारा ध्वस्त कर दिया गया ,, और अंग्रेजो ने एक रूटमैप तैयार किया था बकायदा नक्शा तैयार किया था जिसमे इस किले और उसके सामने मौजूद विशाल झील नक्शे में उल्लेखित है वह विशाल झील राजा बिजली पासी की झील हुआ करती थी ,पर अफसोस दस्तावेजों में झील तो दर्ज है पर अब मौजूद नही —- कारण 2007 के बाद मायावती सरकार में यह झील पाट दी गईं और उसकी शक्ल स्मृति उपवन के रुप में बदल दी गईं ।
दिए गए फोटो में 1857 में जनरल आउटरम का नक्शा जिसमे पासी किला यानि ( fort jalalabad ) का अंकन है दुसरा चित्र 1858 में कर्नल हड्डसन द्वारा इस किले का चित्र बनाया गया था जिसमे साफ साफ यह किला सुंदर और आकर्षक लग रहा है
और बहुत बडी झील जिसमें चार-पांच किला समा जाए
Ref. नक्शा – outram biography
Pasi history – Oudh gazeetter
&Oral history Pasi activists

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